Saturday, September 1, 2018

Computer Generation in Hindi | कंप्यूटर की पीढ़ियां | RSCIT Notes In Hindi #2

Computer Generation In Hindi Language | कंप्यूटर की पीढ़ियां | RSCIT Notes In Hindi #2 -:

आज RSCIT Notes In Hindi #2 में हम बात करेंगे कंप्यूटर की पीढ़ियों के बारे में, Computer Generation में हम कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियों के बारे अच्छे से Complete with Images पढ़ेंगें ताकि आपको बार बार Computer Generation को Read न करना पड़े आपको एक बार में ही अच्छे से समझ में आ जाये।
Computer Generation in Hindi
Dosto शुरुआत में Computer बहुत बड़े-बड़े होते थे। जैसा कम्प्टूयर आज दखाई देता हैं। ऐसा पहले नहीं होता था। पहले के Computers बड़े होने के कारण उनको एक बड़े कमरे में रखा जाता था। जेसे-जैसे समय गुजरता गया। Computer का आकार भी समय के साथ छोटा होता गया।

तो चलिए जानते हैं कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियों के बारे में -


1. प्रथम पीढ़ी (1942 से 1956 तक) :-

  • पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum tube) और डेटा भंडारण के लिए चुंबकीय ड्रम (Magnetic drum) का उपयोग होता था।
Vacuum tube
Vacuum tube
Magnetic drum
Magnetic drum
  • इन कंप्यूटर का आकर काफी बड़ा होता था जिसके कारण इनको एक बड़े कमरे की आवश्यकता होती थी।
  • ये कंप्यूटर बहुत महंगे होते थे
  • ये कंप्यूटर बहुत ज्यादा मात्रा में गर्मी पैदा करते थे जिसके कारण इनको ठंडा करना पड़ता था।
  • इन कम्प्यूटर्स का रखरखाव बहुत महंगा होता था।
  • पहली पीढ़ी के कम्पूटरो को Operate करने के लिए Machine Language का उपयोग Programing Language के रूप में किया जाता था।
  • इन कम्प्यूटर्स को Input, Panch Card और कागज टेप के माध्यम से किया जाता था।
  • Panch Card
    Panch Card
  • ये Computer एक समय में केवल एक समस्या का ही समाधान कर सकते थे।

2. दूसरी पीढ़ी (1956 से 1965 तक) :-

  • दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में ट्रांजिस्टर (Transistor) का उपयोग किया जाने लगा। Transistor अधिक कुशल, तेज, कम बिजली की खपत और प्रथम पीढ़ी में उपयोग होने वाली वैक्यूम ट्यूब से सस्ते और विश्वसनीय थे।
    Transistor
    Transistor
  • ये कंप्यूटर भी बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते थे, परन्तु ये अधिक विश्वसनीय भी थे।
  • इस पीढ़ी में चुंबकीय टेप (Magnetic Tap) एवं चुंबकीय डिस्क (Magnetic disk) को सेकण्डरी भंडारण उपकरणों (Secondary storage devices) के रूप में उपयोग में लिया जाने लगा था।
  • इस पीढ़ी में उच्च स्तरीय कंप्यूटर प्रोगरामिंग भाषा में कॉबोल और फोरट्रान (Cobol and Fortran) की शुरुआत की गई। 

3. तीसरी पीढ़ी (1965 से 1975 तक) :-

  • तीसरी पीढ़ी में Transistor के स्थान पर IC (इंटीग्रेटेड सर्किट) का उपयोग होने लगा।
  • एक IC (Integrated Circuit) चिप में हजारो Transistor को सम्म्लित किया जाने लगा जिसके कारण Computer का आकार और भी छोटा हो गया।
    Integrated Circuit
    Integrated Circuit
  • इस पीढ़ी के कम्पूटरो में डाटा Input/Output करवाने के लिए Keyboard और Monitor का उपयोग किया जाने लगा।
  • Operating System की अवधारणा भी इसी पीढ़ी में शुरू की गई।
  • इसी पीढ़ी में Time Sharing और Multi programing Operating System को पेश किया गया।
  • तीसरी पीढ़ी की कई उच्च स्तरीय Programing Language - फोरट्रान, पास्कल, Basic इत्यादि।

4. चतुर्थ पीढ़ी (1975 से 1988 तक) :-

  • इस पीढ़ी में Microprocessor की शुरुआत की गई, जिसमे हजारो IC Chip एक सिलिकॉन चिप पर निर्मित किये जाने लगे।
    Microprocessor
    Microprocessor
  • आपको बता दें की Microprocessor Chip सिलिकॉन का बना होता हैं।
  • इस पीढ़ी में VLSI (Very Large-Scale Integration) तकनीक का उपयोग किया गया।
  • इस पीढ़ी कंप्यूटर का आकार बहुत ज्यादा छोटा हो चूका था
  • इस पीढ़ी में Time Sharing, Real Time Processing, Distributed Operating System का इस्तेमाल किया जाने लगा था।
  • इस पीढ़ी में नई उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा - C, C++ इत्यादि का इस्तेमाल किया गया। 

5. पंचम पीढ़ी (1988 से अब तक) :-

  • इस पीढ़ी एक नई तकनीक उभर कर आई हैं जिसे ULSI (अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन) कहा जाता हैं, जिसमे 10 लाख Microprocessor Chips को शामिल किया जा सकता हैं।
  • इस पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) और Voice Recognition, मोबाइल संचार, सेटेलाइट संचार , सिग्नल डाटा प्रोसेसिंग को शुरू किया गया हैं।
  • इस पीढ़ी की उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा - JAVA, VB, .NET आदि हैं।

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