Sunday, October 28, 2018

RSCIT EXAM - 20 JANUARY 2019 IMPORTANT QUESTIONS WITH ANSWERS IN HINDI 2019

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RSCIT EXAM- 20 January 2019.

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A. Network Topologies :-

नेटवर्क टोपोलॉजी एक कंप्यूटर नेटवर्क के विभिन्न तत्व जैसे लिंक्स, नोड्स आदि की व्यवस्था है। 
दो नेटवर्क टोपोलॉजी समान होते हुए भी नोड्स के बीच दूरी, भौतिक इंटरकनेक्शन, ट्रांसलेशन रेट या सिग्नल टाइप बिल्कुल भिन्न हो सकतेँ हैं। 
नेटवर्क टोपोलॉजी को छह प्रकार में बांटा गया है-
  1. Bus Topology 
  2. Star Topology
  3. Ring Topology
  4. Tree Topology
  5. Hybrid Topology
  6. Mesh Topology 
1. Bus Topology :-
Bus Topology.

  • लोकल एरिया नेटवर्क में इसका उपयोग किया जाता हैं। 
  • यह बाकी टोपोलॉजी से सस्ती होती हैं। 
  • इसमें, इंटरफ़ेस कनेक्टर की मदद से प्रत्येक नोड एक ही केबल से जुड़ा होता हैं। 
  • इसमें एक केंद्रीय केबल लगी होती हैं। जो इस नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती है। 
  • बस टोपोलॉजी केवल एक तार पर आधारित होती हैं। अर्थात इसमें एक केबल उपयोग में लिए जाता हैं, जिसके कारण अगर इसमें कहीं पर भी समस्या होती हैं तो पूरा नेटवर्क बंद हो जाता हैं .
 नोड्स - वह डिवाइस जो एक नेटवर्क से जुड़ी होती हैं, नोड्स कहलाती हैं। यह एक कंप्यूटर, प्रिंटर अदि हो सकता हैं। 
हब - 

2. Star Topology :-
Star Topology.

  • इसका आकर एक स्टार के समान होने के कारण इसे स्टार टोपोलॉजी कहा जाता हैं। 
  • लोकल एरिया नेटवर्क में, प्रत्येक नेटवर्क होस्ट एक पॉइंट टू पॉइंट कनेक्शन के साथ एक केंद्रीय हब से जुड़ा होता हैं। 
  • केंद्रीय हब के खराब होने से पूरा नेटवर्क ठप हो जाता हैं। 

3. Ring Topology :-
Ring Topology.

  • इसका आकर वृताकार / एक Ring के समान होता हैं। 
  • रिंग टोपोलॉजी में डेटा सिर्फ एक ही दिशा से भेजा जा सकता हैं। 
  • इस टोपोलॉजी में प्रत्येक नॉड्स में एक Receiver और एक Transmitter लगा होता हैं। ताकि नॉड्स डेटा प्राप्त करके आगे वाले नॉड्स को भेज सके। 

4. Tree Topology :- 
Tree Topology.

  • ट्री टोपोलॉजी, बस और स्टार टोपोलॉजी का एक सयोंजन हैं। 

5. Hybrid Topology :- 

  • हाइब्रिड नेटवर्क, दो या दो से अधिक नेटवर्क टोपोलॉजी को मिलके बनाया जाता हैं। 
  • इसके उदाहरण : स्टार रिंग नेटवर्क , स्टार बस नेटवर्क। 

6. Mesh Topology :- 
Mesh Topology.

  • इस टोपोलॉजी में प्रत्येक नॉड्स डेटा को वितरण और संचरण कर सकता हैं। 
  • यह टोपोलॉजी काफी विश्वसनीय हैं 
  • इसमें एक नॉड्स से दूसरे नॉड्स तक डेटा भेजने के लिए एक से अधिक मार्ग होते हैं, ताकि अगर एक मार्ग से डेटा नहीं पहुंच पाता तो दूसरे मार्ग से आसानी से डेटा का आदान-प्रदान किया जा सके। 


B. Computer Memory :-

कम्प्यूटर मेमोरी को दो भागो में बांटा गया हैं-
१. Primary Memory 
२. Secondary Memory 

Primary Memory :- 
यह मेमोरी कंप्यूटर के काम आने वाली सबसे तेज मेमोरी होती हैं। 
प्राइमरी मेमोरी के बिना कंप्यूटर नहीं चलता। 

RAM और ROM प्राइमरी मेमोरी होती हैं। 

RAM - Random Access Memory- 
यह मेमोरी वॉलेटाइल मेमोरी होती हैं।
बिजली जाने पर इसमें पड़ा डेटा नष्ट हो जाता हैं।  
इसमें जानकारी को - पढ़ना और लिखना, दोनों कार्य किये जाते हैं। 

ये दो प्रकार की होती हैं -
DRAM - Dynamic Random Access Memory.
SRAM - Static Random Access Memory.

ROM - Read Only Memory-
यह मेमोरी नॉन-वॉलेटाइल मेमोरी होती हैं। 
बिजली जाने पर इसमें पड़ा डेटा नष्ट नहीं होता। 
इसमें संग्रहित डेटा को बदला नहीं जा सकता। 

ROM के प्रकार - 
PROM- Programmable Read-Only Memory
EPROM- Erasable Programmable Read-Only Memory
EEPROM- Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory

Secondary Memory :- 

HDD- Hard Disk Drive
Optical Disk :
CD - Compact Disk
CD-R - Compact Disc-Recordable
CD-RW - Compact Disc-ReWritable
DVD - Digital Video / Versatile Disc (Blue-Ray Disk- 50 to 500 GB)


C. Windows 10 :-

29 जुलाई 2015 को रिलीज किया गया था।
विंडोज 10 के कुछ Features -
a. Multiple Desktop : इसमें आपको एक से अधिक डेस्कटॉप बनके उपयोग में लेने की अनुमति दी जाती हैं। जैसे - आप अपने घर के लिए अलग डेस्कटॉप और ऑफिस के लिए अलग डेस्कटॉप बना सकते हो। और एक डेस्कटॉप से दूसरे डेस्कटॉप पर आसानी से स्विच कर सकते हैं।

b. Microsoft Edge : विंडोज 10 में इंटरनेट एक्स्प्लोर को माइक्रोसॉफ्ट एज ब्राउज़र के द्वारा रिप्लेस किया गया हैं।
 इस ब्राउज़र के बारे में कुछ बातें -
पहला ऐसा ब्राउज़र जिसमे आप सीधे ही वेब पेज पर नोट लिख सकते हो।
यह गूगल के डूडल के बारे में बताता हैं।
इसके द्वारा वेब पेज को हाईलाइट भी कर सकते हैं।
किसी भी आर्टिकल को सेव करके बाद में पढ़ने की अनुमति देता हैं

c. Windows Store : जिस प्रकार एंड्राइड मोबाइल में कोई भी एप्स डाउनलोड करने के लिए Play Store होता हैं। उसी प्रकार से Microsoft Windows में Windows Store दिया गया हैं। जहां से हम हर प्रकार के एप्स डाउनलोड करके अपने कंप्यूटर में चला सकते हैं।

d. Cortana : यह एक Digital Personal Assistant हैं।
कोर्टाना के बारे में -
आपको अपने कंप्यूटर में स्टोर की गई फाइल्स को ढूंढ़ने में आपकी मदद करता हैं।
कुछ याद दिलाने में मदद करता हैं।
आपके साथ चैट करता हैं।
आपको अपना पसंदीदा म्यूजिक सुनाता हैं।
आप इससे बात भी कर सकते हैं। जिसके लिए आपको आदेश देने के लिए माइक्रोफोन की जरूरत होगी।

e. Math Input Panel : यह विंडोज 10 का इन-बिल्ट फीचर हैं। जिसमे आप मैथ के फंक्शन्स को हाथ से लिख सकते हो।

f. Snipping Tool : इसके द्वारा हम स्क्रीन के किसी भी हिस्से को कैप्चर कर सकते हैं। अर्थात Screen Short ले सकते हैं। 

g. Mobility Center : इसके द्वारा निम्नलिखित सेटिंग्स हम कर सकते हैं। 

  • ब्राइटनेस - कंप्यूटर मॉनिटर की स्क्रीन की चमक को अपने अनुसार करना। 
  • वॉल्यूम - स्पीकर की आवाज को कण्ट्रोल करना। 
  • बैटरी स्टेटस - अगर आप लेपटॉप में विंडोज 10 का उपयोग करोगे तो बैटरी की पूरी जानकारी आपको मिलेगी। 
  • वायरलेस नेटवर्क - वायरलेस नेटवर्क को मैनेज किया जाता हैं। 
  • स्क्रीन रोटेशन - मॉनिटर स्क्रीन को पोट्रेट और लैंडस्केप में बदलना अर्थात स्क्रीन को उल्टा सीधा करना। 
  • एक्सटर्नल डिस्प्ले - इससे आप अपने कंप्यूटर के साथ एक से अधिक मॉनिटर जोड़ सकते हो। 


D. Cloud Storage :- 

यह एक सर्विस मॉडल हैं , जहां यूजर को नेटवर्क के माध्यम से डाटा प्रदान किया जाता हैं। और डाटा की सार-संभाल और बैकअप लिया जाता हैं। 

कुछ क्लाउड स्टोरेज सर्विसेस :

Google Drive - इसके साथ आपको ऑफिस टूल प्रदान किये जाता हैं, जिनमे वर्ड प्रोसेसर, स्प्रेडशीट, प्रेजेंटेशन बिल्डर होते हैं। और इसमें आपको 15 GB का फ्री स्पेस मिलता हैं। जिसमे आप अपना डाटा स्टोर कर सकते हो। अगर आपके पास google अकाउंट हैं तो आप आसानी से drive.google.com टाइप करके इसका उपयोग कर सकते हो। 

Microsoft One Drive - यह माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा प्रदान किया जाता हैं। जो उपयोगकर्ता windows 8 और windows 10 का इस्तेमाल करते हैं। उनको माइक्रोसॉफ्ट वन ड्राइव पहले से ऑपरेटिंग सिस्टम में सम्मलित मिलता हैं। बस आपको विंडोज स्टोर से एक एप्प डाउनलोड करनी पड़ेगी। 

Drop Box - यह सबसे पसंदीदा क्लाउड स्टोरेज हैं। और भरोसेमंद भी और बिलकुल सरल भी। इसका इस्तेमाल विंडोज, मैक, एंड्राइड और लिनक्स में कर सकते हैं। 


E. Web Browser :-

ब्राउज़र एक सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन हैं जो WWW (World Wide Web) पर कंटेंट को खोजने, प्राप्त करने और प्रदर्शित करने के उपयोग में आता हैं।

लोकप्रिय ब्राउज़र - माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्स्प्लोरर / माइक्रोसॉफ्ट एज और गूगल क्रोम 

अन्य ब्राउज़र - मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स, ओपेरा, एप्पल सफारी, नेटस्केप नेविगेटर आदि वेब ब्राउज़र होते हैं। 


F. Search Engine :- 

जब हम इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करते हैं तो हमे सर्च इंजन का सहारा लेना पड़ता हैं। यह एक सॉफ्टवेयर होता हैं जिसके माध्यम से हम इंटरनेट पर सर्च कर पाते हैं। 

कुछ सर्च इंजन्स के नाम -
गूगल (सबसे ज्यादा उपयोग में लिया जाने वाला सर्च इंजन), बिंग, याहू, बायडू (यह चीन का सर्च इंजन हैं), एओएल (इसे पहले अमेरिकन ऑनलाइन कहा जाता था), आस्क, लाइकोस आदि सर्च इंजन हैं। 


G. Computer Hardware :-

 वे उपकरण जिनको एक भौतिक स्वरूप दिया गया होता हैं। 
प्रमुख दो प्रकार -

Input Device :- ये उपकरण डेटा को कम्प्यूटर के अंदर भेजने में मदद करते हैं। - Keyword, Scanner, Microphone, Mouse, Joystick, Light pen, Web cam आदि। 

Output Device :- ये उपकरण डेटा को कंप्यूटर से प्राप्त करके यूजर को इस रूप से प्रदर्शित करते हैं। ताकि आसानी से समझ में आ सके। - Printer, Monitor(सॉफ्टकॉपी प्रदान करते हैं), Speaker, Projector आदि। 


H. Printers :- 

डाक्यूमेंट्स, इमेजेज आदि को कागज पर प्रिंटर के द्वारा छापा जाता हैं। 
प्रिंटर हार्डकॉपी प्रदान करते हैं। 
प्रिंटर की आउटपुट गुणवत्ता DPI (डॉट्स प्रति इंच) में मापी जाती हैं।  

प्रिंटर को दो भागो में वर्गीकृत किया गया हैं। 
Impact Printer 
Non- Impact Printer 

१. Impact Printer -
करैक्टर प्रिंटर - ये एक समय में एक करैक्टर को प्रिंट करते हैं। इस तरह के प्रिंटर में लोकप्रिय प्रिंटर - डॉट मैट्रिक्स और डेजी व्हील प्रिंटर हैं। इनमे एक रिबन होता है, जो अक्षर प्रिंट करने में मदद करता हैं। ये बहुत ज्यादा शोर करते हैं। इनका उपयोग बड़े-बड़े व्यवसायिक काम-काज में किया जाता हैं 

लाइन प्रिंटर - इनको चैन प्रिंटर, ड्रम प्रिंटर के रूप में भी जाना जाता हैं। इनमे भी रिबन का इस्तमाल किया जाता हैं। 

२. Non- Impact Printer - ये बहुत तेज होते हैं। बहुत कम आवाज के साथ काम करते हैं। 
इंक-जेट प्रिंटर - ये प्रिंटर छोटी-छोटी बूंदो का छिड़काव के द्वारा पेज पर इमेज को प्रिंट करते हैं। इसमें भिन्न-भिन्न रंगो का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ये बहुत सस्ते होते हैं और लम्बे समय तक चलते हैं। 

लेजर प्रिंटर - इनका इस्तेमाल कार्यालय और व्यवसायिक तोर पर किया जाता हैं। ज्यादातर लेजर प्रिंटर में ब्लैक कलर के होते है। ये प्रिंटर इंक-जेट प्रिंटर से भी तेज होते हैं। 
इन प्रिंटरों की गति को PPM (पेज प्रति मिनट) में मापा जाता हैं। 

इनके अलावा थर्मल प्रिंटर और प्लॉटर भी नॉन-इम्पेक्ट प्रिंटर के उदाहरण हैं। 


I.  E-Commerce :-

किसी भी सामान को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से खरीदना या बेचने ई-कॉमर्स कहलाता हैं और इसका पूरा नाम - इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स होता हैं।

इसके प्रकार -
Business 2 Consumer[B2C]- (व्यापार से ग्राहक) - कंपनी अपना माल सीधे ग्राहक को बेचती हैं।
Business 2 Business[B2B]- (व्यापार से व्यापार) - एक कंपनी अपना माल सीधे दूसरी कंपनी को बेचती हैं।
Consumer 2 Business[C2B]- (ग्राहक से व्यापार) - इसमें ग्राहक अपना माल कंपनी को बेचता हैं।
Consumer 2 Consumer[C2C]-  (ग्राहक से ग्राहक) - ग्राहक अपना माल सीधे दूसरे ग्राहक को बेचता हैं।
mCommerce- (मोबाइल कॉमर्स) - मोबाइल से माल खरीदना या बेचना मोबाइल कॉमर्स कहलाता हैं। आने वाली अगली पीढ़ी में आप इसे देख सकते हैं।

ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट -
  • Amazon.com
  • Flipkart.com
  • Snapdeal.com
  • Paytm.com
  • Jabong.com
  • Myntra.com


J. E-mail :-

ईमेल (Electronic mail) एक मैसेज की तरह होता हैं जिसे एक से अधिक लोगो के पास एक साथ भेज सकते हैं।
वर्तमान में ईमेल भेजने के लिए G-mail, Yahoo-mail, आउटलुक काफी ज्यादा लोक्रपिय हैं
ईमेल भेजने के लिए हमे पहले कोई एक ईमेल प्लेटफार्म पर Sign Up करना होता हैं, जहां से हमे अपना एक यूजरनाम बनाना होता हैं। जो हमारा ईमेल पता (E-mail Address) कहलाता हैं।


  • एक ईमेल एड्रेस के 2 भाग होते हैं।
  • एक ईमेल एड्रेस में @ होता हैं।
  • इसमें दो डॉट (..) एक साथ नहीं होते।
  • इसमें भी स्पेस (खाली जगह) नहीं होता।
  • इसमें अल्फाबेट और न्यूमेरिकल और सिंबल भी होते हैं।
  • जैसे - Ramsita15@gmail.com

Google Mail (G-mail) के कुछ जरूरी पहलू -
Compose - इसपे क्लिक करके हम नई मेल लिख सकते हैं।
Inbox - इसमें आपको प्राप्त होने वाली मेल की लिस्ट मिलेगी।
Drafts - अगर आप कोई मेल लिख रहे हो तो, किसी कारणवश मेल बॉक्स बंद हो जाये तो जितनी आपने मेल लिखी थी उतनी Drafts में सेव हो जाती हैं।
Spam - कोई दुर्भावनापूर्ण मेल अगर आपको कोई भेजता हैं तो वो अपने आप स्पैम बॉक्स में चली जाती हैं। इस प्रकार की मेल में वायरस बगेरा का खतरा होता हैं। इनको आनचाही मेल भी कहते हैं।
Trash - अगर कोई मेल आपसे गलती से डिलीट हो जाये तो आप ट्रैश बॉक्स से उस मेल को बापस प्राप्त कर सकते हो। इसमें डिलीट की गई मेल 30 दिनों तक स्टोर रखी जाती हैं उसके बाद मेल ट्रैश बॉक्स में से अपने आप डिलीट हो जाती हैं।



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