Thursday, November 29, 2018

RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019.

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RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019. 
इस अध्याय के अंदर इंटरनेट की पूरी जानकारी लेंगे हम पढ़ेंगे - इंटरनेट कैसे चलता है, इंटरनेट के लिए कौन कौन से उपकरण चाहिए, इसी के साथ साथ हम वेब ब्राउजर, सर्च इंजन, ईमेल आदि के बारे में पढ़ेंगे।

नोट :- अगर आप इस RSCIT Notes को वीडियो के माध्यम से समझना चाहते हैं, तो हमने इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में आपके लिए एक अच्छा सा वीडियो भी जोड़ा है। तो अगर आपको वीडियो देख कर पढ़ना आसान लगता है, तो कृपया करके आप वीडियो को इस पोस्ट के बिल्कुल अंत में जाकर देख सकते हैं।


➧ इंटरनेट का परिचय (Introduction to Internet) :- 
इंटरनेट "सूचना का सुपर हाईवे" के नाम से प्रसिद्ध है। इंटरनेट के द्वारा वर्तमान में हम बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जैसे- राजनीति बहस, ऑनलाइन बुक पढ़ना, यूट्यूब पर वीडियो देखना और भी बहुत सारे ऐसे काम है, जो हम अपने घर बैठे कर सकते हैं इंटरनेट के माध्यम से।

इंटरनेट को मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टेबलेट आदी में बहुत ही आसानी से चला सकते हो।

क्लाइंट- जो कंप्यूटर सूचना प्राप्त कर रहा है, वह क्लाइंट होता है।
सर्वर- जो कंप्यूटर सूचना भेज रहा है वह सर्वर कहलाता है।
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर- जो कंपनियां इंटरनेट प्रदान करती है, सर्विस प्रोवाइडर कहलाती हैं।

➧ इंटरनेट को एक्सेस कैसे करें : -
इंटरनेट एक्सेस करने के लिए आपके पास कंप्यूटर या मोबाइल होना चाहिए। इसके साथ-साथ कंप्यूटर के अंदर कोई वेब ब्राउज़र और अगर आपके पास डेस्कटॉप कंप्यूटर है तो मॉडेम की आवश्यकता होगी और इंटरनेट कनेक्शन भी आपके पास होना चाहिए।

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) :
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यह वह कंपनियां होती हैं जो इंटरनेट के साथ साथ हमें और भी सुविधाएं प्रदान करती हैं।  जैसे डोमेन नेम सिस्टम, वेब होस्टिंग आदि।

मॉडेम: इसका पूरा नाम मॉडरेशन डिमोलिशन (Moderation Demolition) या Modulator-Demodulator होता है। एक मॉडेम का काम डिजिटल इन्फॉर्मेशन को एनालॉग और एनालॉग इंफॉर्मेशन को डिजिटल में परिवर्तित करना होता है।

मॉडेम के भी कई प्रकार होते हैं-
➤ इंटरनल मॉडेम (आंतरिक मॉडेम) -
यह मॉडेम हमारे डेस्कटॉप या लैपटॉप में इंस्टॉल होता है। यह मॉडेम एक्सटर्नल मॉडेम से सस्ते होते हैं। और इनके लिए अलग से पावर सप्लाई और चैसी की आवश्यकता नहीं होती।

आंतरिक को दो भागों में बांटा गया है-
डायल अप (Dial-Up) - एक टेलीफोन केबल पर काम करता है। इसे टेलीफोन नंबर की आवश्यकता होती है और कनेक्शन स्थापित करने के लिए लॉग इन करना पड़ता है।
वाईफाई (WI-Fi) - वाईफाई नेटवर्क बिना किसी लॉगइन के एक्सेस होता है।

➤ एक्सटर्नल मॉडेम (बाहरी मॉडेम) - इनको सेट-अप करना काफी आसान होता है। यह टेलीफोन लाइन से जुड़ी होती हैं। और इन के लिए अलग से बिजली की आवश्यकता होती है। और अगर इनका इंटरनेट कनेक्शन रोकना चाहे तो मॉडेम को अलग से बंद कर सकते हैं।
इस मॉडेम के उदाहरण डी.एस.एल मॉडेम और ब्रॉडबैंड कनेक्शन है।

➤ पीसी कार्ड मॉडेम - यह मॉडेम पोर्टेबल कंप्यूटर के लिए बनाया गया है। यह एक क्रेडिट कार्ड के आकार का होता है। नोटबुक और हैंडहेल्ड कंप्यूटर पर पीसी कार्ड स्लॉट में इसे हम आसानी से लगा सकते हैं। जब इसकी आवश्यकता नहीं होती तो हम इसे हटा भी सकते हैं। इनमें टेलिफोन केबल के अलावा और किसी केबल की आवश्यकता नहीं होती।

➧ इंटरनेट कनेक्टिविटी के प्रकार :-
 कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए बहुत सारे माध्यम हम यूज कर सकते हैं।

⏩ डायल-अप (Dial Up) : यह सबसे धीमी गति का इंटरनेट कनेक्शन है, जो कि आजकल अप्रचलित है। इस को एक फोन कॉल की तरह नंबर डायल करके इंटरनेट से जोड़ा जाता है, और जब हम वेब सर्फिंग नहीं करेंगे तो यह अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाएगा।

⏩ ब्रॉडबैंड (Broadband) : यह हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन आमतौर पर टेलीफोन कंपनियों द्वारा प्रदान किया जाता है। ब्रॉडबैंड शब्द - ब्रॉड बैंडविड्थ से बना है। यह काफी तेज होता है। इसके कारण हम कंप्यूटर पर वॉइस कॉल, ऑडियो और वीडियो स्ट्रीमिंग की अच्छी गुणवत्ता का फायदा उठा सकते हैं। ब्रॉडबैंड की गति को सामान्यतः मेगाबाइट प्रति सेकंड (Mbps-Megabits per Second) में मापा जाता है।

⏩ वाईफाई (Wi-Fi) : इसका पूरा नाम वायरलेस फिडेलिटी (Wireless Fidelity) होता है। और यह WLAN यानी कि Wireless लोकल एरिया नेटवर्क में यूज होता है। यह कनेक्शन रेडियो फ्रिकवेंसी के द्वारा होता है। इसका उपयोग पर्सनल कंप्यूटर, वीडियो गेम, स्माटफोन, डिजिटल कैमरा, टेबलेट कंप्यूटर आदि में किया जाता है। लगभग 20 मीटर ( 66 फीट ) की दूरी तक इसकी रेंज रहती है। और जहां दीवारें होती हैं वहां पर इसका दायरा कम हो जाता है क्योंकि दीवारें रेडियो तरंगों को ब्लॉक कर देती है उनको आगे नहीं बढ़ने देती।

⏩ डी एस एल (DSL) : पूरा नाम डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन होता हैं। यह डायल-अप कनेक्शन से तेज होता है। फोन लाइन के माध्यम से यह कनेक्ट होता है। इसके लिए लैंडलाइन की आवश्यकता नहीं होती। और डायल -अप के विपरीत यह एक बार कनेक्ट होने की बाद में हमेशा कनेक्ट रहता है। इसके साथ फोन लाइन भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

⏩ केबल (Cable) : केबल सेवा, केबल टीवी के माध्यम से इंटरनेट से कनेक्ट करती है। इसके लिए केबल टीवी होने की जरूरत नहीं है। यह एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन का उपयोग करता है। Dial-up और DSL सेवा की तुलना में यह तेज होता है, परंतु यह उन्हीं स्थानों पर उपलब्ध हो सकता है जहां पर केबल टीवी होता है।

⏩ उपग्रह (Satellite) : यह कनेक्शन ब्रॉडबैंड का उपयोग करता है, लेकिन इसके लिए केबल या फोन लाइनों की आवश्यकता नहीं होती। पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रह के माध्यम से यह हमें इंटरनेट से जोड़ता है। जिसके कारण दुनिया में कहीं भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। परंतु मौसम खराब होना इसके लिए हानिकारक होता है। एक उपग्रह कनेक्शन थोड़ी देरी से डाटा संचार करता है। इसलिए यह रियल टाइम एप्लीकेशन के साथ वर्क नहीं कर सकता। जैसे- गेमिंग या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि के साथ काम करना थोड़ा कठिन है।

⏩ मोबाइल (Mobile) : मोबाइल के माध्यम से भी हम इंटरनेट से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में सर्विस प्रोवाइडर हमें 3G 4G इंटरनेट कनेक्शन प्रदान कर रहे हैं। इसे हम कहीं पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। (जहां पर इंटरनेट कनेक्शन हो)

➧ इंट्रानेट (Intranet) :
एक निजी नेटवर्क होता है, यह उसी संगठन के कर्मचारियों के लिए होता है जिसके लिए इसे बनाया जाता है। एक आम इंटरनेट यूज करने वाला व्यक्ति इंट्रानेट का यूज नहीं कर सकता क्योंकि इंट्रानेट किसी बड़ी कंपनी का एक अलग से नेटवर्क होता है।

➤ इंटरनेट बनाम इंट्रानेट :
इंटरनेट ग्लोबल वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) है, जबकि इंट्रानेट एक निजी कंपनी का इंटरनेट हैं ,जिसे सिर्फ कंपनी के अंदर इस्तेमाल किया जा सकता है। जिसके लिए इसे बनाया जाता हैं।
इन दोनों के अंदर TCP/IP (Transmission Control Protocol / Internet Protocol) प्रोटोकोल का उपयोग होता है। दोनों के द्वारा एक जैसा काम किया जाता है। और  एक इंट्रानेट यूजर, इंटरनेट एक्सेस कर सकता है परंतु एक इंटरनेट यूजर इंट्रानेट नहीं एक्सेस कर सकता क्योंकि इंट्रानेट में फायरवॉल सिक्योरिटी होती है। जो कि किसी आम व्यक्ति को उसे एक्सेस करने से रोकती है।





➧ वेबसाइट (Website) : 
वेबसाइट पर वेब पेज होते हैं। इंटरनेट पर बनाई गई वेबसाइट में बहुत सारे वेब पेज होते हैं, जो कि एक दूसरे पेज से हाइपरलिंक के द्वारा लिंक होते हैं, वेबसाइट किसी निजी व्यक्ति या फिर एक बड़ी कंपनी की भी हो सकती है। और वेबसाइट के मुख्य पेज को होमपेज के नाम से जाना जाता है। बहुत सारी वेबसाइट एक दूसरी वेबसाइट से हाइपरलिंक के माध्यम से जुड़ी हो सकती हैं।
और वेबसाइट को एक कंप्यूटर सिस्टम पर होस्ट किया जाता है। जिसे सर्वर कहा जाता है। इसे HTTP Server भी कहा जा सकता है।

वेबसाइट दो प्रकार की होती हैं -
स्टैटिक वेबसाइट - स्टैटिक वेबसाइट में जानकारी स्थिर होती है। यूजर उस में कुछ बदलाव नहीं कर सकता।  डायनेमिक वेबसाइट - डायनेमिक वेबसाइट एक समुदाय का हिस्सा होती है। इसमें किसी भी यूजर के द्वारा बदलाव किया जा सकता है।

➧ URL- Uniform Resource Locator : यह एक वेब संसाधन का सन्दर्भ हैं। यह वेबसाइट, फाइल या दस्तावेज का सामान्य प्रारूप में इंटरनेट पता होता है।
एक यू.आर.एल. में क्या क्या होता हैं - नीचे दी गई चित्र को ध्यान से देखें -

➧ Top Level Domain - सभी वेबसाइट अंत में .com, .in, .org. .govt आदि नेम होते हैं, जिनके कारण हमें समझने में आसानी होती है कि यह वेबसाइट कौन से क्षेत्र की है।
नीचे टेबल में कुछ उदाहरण दिए गए हैं उनको देखिए -

➧ DNS - Domain Name System
➧ IP Address - इंटरनेट पर हमारी डिवाइस की पहचान आईपी एड्रेस से होती हैं। इसका उदाहरण - 198.105.232.4



➤ वेब ब्राउजर : 
वेब ब्राउजर एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन होती है। जो कि WWW (वर्ल्ड वाइड वेब) पर कंटेंट को लोकेट करने, प्रदर्शित करने में इस्तेमाल होती है। जैसे इमेज, वेब पेज, वीडियो कंटेंट आदि को प्रदर्शित कर सकता है। ब्राउज़र एक क्लाइंट की तरह काम करता है।

हम जो सर्च करते हैं, वह हमें ब्राउज़र प्रदान करता है ब्राउज़र में बहुत सारे एलिमेंट होते हैं-

बैकवर्ड और फोरवोर्ड बटन - यह बटन पीछे और आगे जाने के लिए इस्तेमाल होता है।
रिफ्रेश बटन - यह वर्तमान के पेज को दोबारा लोड करता है।
न्यू टैब - बहुत सारी वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए होता हैं (Ctrl+T)
स्टॉप बटन - रीलोड हो रहे पेज को रोकता है।
होम बटन - यूजर को मुख्य पृष्ठ पर लेकर जाता है।
एड्रेस बार - यहां पर यू.आर.एल. दिखाई देता है। ऐसे सर्च बार भी बोल सकते हैं।
स्टेटस बार - जो संसाधन या पेज को लोड करने की प्रगति दर्शाती है, व साथ में जूमिन बटन भी होते हैं
व्यू पोर्ट - ब्राउज़र में वेब पेज शो करने के लिए एक क्षेत्र होता है जिसे व्यू पोर्ट के नाम से जाना जाता है।

अधिकतर ब्राउज़र एच.टी.टी.पी. सिक्योर को स्पॉट करते हैं।

एच.टी.टी.पी.एस. (Hyper Text Transfer Protocol Secure) यह एक प्रोटोकोल होता है। इसमें कनेक्शन ट्रांसपोर्ट लेयर (CTL) और या सिक्योर सॉकेट लेयर (SSL) द्वारा हमारी जानकारी को गोपनीय रखा जाता है।

दो लोकप्रिय ब्राउजर है - माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर और माइक्रोसॉफ्ट एज इसके अलावा गूगल क्रोम, फायरफॉक्स, एप्पल सफारी और ओपेरा भी काफी पॉपुलर है।

➧ वेब सर्च करना - इसके माध्यम से हम बहुत सारी सूचना प्राप्त कर सकते हैं। पर कभी कभी गलत सूचनाएं भी प्राप्त हो जाती हैं।

 सर्च इंजन - वेब सर्च ,एक सर्च इंजन के माध्यम से ही संभव होता है। सर्च इंजन वह सॉफ्टवेयर है। जो वर्ल्ड वाइड वेब से संबंधित सूचनाओं को खोजने के लिए बनाया गया है। सर्च रिजल्ट समान्यता: परिणामों की एक सूची के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। एक वेब पेज चित्र, फाइलें, वीडियो आदि का मिश्रण होता है।

सर्च इंजन भी भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं - जैसे गूगल, याहू, बिंग, आस्क ,बायडू (यह चाइना का सर्च इंजन है) इत्यादि।

एक सर्च इंजन वास्तविक समय में निम्नलिखित प्रक्रियाओं को संभालता है -

1. वेब क्रॉलिंग / वेब स्पाइडर - जिन वेबसाइट पर अच्छा डेटा उपलब्ध होता हैं उनको उपयोगकर्ता तक पहुंचते हैं
2. इंडेक्सिंग - इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट होती हैं। इंटरनेट पर भी वेबसाइट इंडेक्स होती हैं जिनमे अच्छी जानकारी होती हैं।
3. सर्चिंग - जो हम सर्च करते है। सर्च इंजन हमे अच्छे प्रणाम देता हैं।

सबसे ज्यादा लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल, बिंग, याहू, हैं। 

गूगल सर्च जिसे सामान्यतः गूगल वेब सर्च या गूगल कहकर संबोधित किया जा सकता है यह एक वेब सर्च इंजन है जो कि वर्ल्ड वाइड वेब पर हमारे द्वारा दी गई सूचना प्राप्त की रिक्वेस्ट को मानता है और हमें सूचना अर्थात परिणाम खोज कर देता है ऐसे ही बिंग, याहू भी वेब सर्च के काम में आते हैं।





➧ विकीपीडिया - यह एक मुक्त विश्वकोश है। इस वेबसाइट पर बहुत सारे लेख लिखे जा चुके हैं, जो कि उपयोगकर्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं दोस्तों आपको बता दें कुछ लोग प्रति घंटे हजारों परिवर्तन लगातार विकिपीडिया में करके इसे सुधार रहे हैं। इसमें वर्तमान में किए गए परिवर्तन और इतिहास में किए गए परिवर्तन के रिकॉर्ड भी आप देख सकते हैं।

➧ ईमेल : ईमेल का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक मेल होता है और आमतौर पर 1993 में यह शुरू हुआ। मैसेज को डिजिटल फॉर्म में एक लेखक से दूसरे या एक से अधिक प्राप्तकर्ताओं तक पहुंचाने का एक तरीका है।
ई-मेल में प्राप्तकर्ता और उपयोगकर्ता को एक ही समय ऑनलाइन रहने की आवश्यकता नहीं होती।

ईमेल मैसेज के 3 भाग होते हैं - एनवलप, संदेश हैडर, मेसेज बॉडी।

लोकप्रिय ईमेल प्लेटफॉर्म में जीमेल, हॉटमेल, याहू मेल, आउटलुक, एवं कई अन्य शामिल है।

किसी ईमेल पते का सामान्य प्रारूप निम्न प्रकार से होता है - abcde@domain और अगर एक विशिष्ट ईमेल है तो उसका उदाहरण निम्न है -abcde@example.org

 ईमेल ऐड्रेस के 2 भाग होते हैं - @ सिंबल से पहले का भाग मेल बॉक्स यानी उपयोगकर्ता का नाम होता है और @ सिंबल के बाद का भाग डोमेन का नेम होता है।

➧ ई-मेल को एक्सेस करना :
सर्वप्रथम ईमेल लिखने के लिए कंपोज ऑप्शन पर क्लिक करना पड़ता है।

CC (Carbon copy) - भेजे गए सभी प्राप्त कर्ताओं को एक दूसरे की जानकारी जैसे - ईमेल एड्रेस आदि दिखाई देती है।
BCC (Blind carbon copy) - भेजे गए सभी प्राप्त कर्ताओं में से किसी को भी एक दूसरे की जानकारी शो नहीं होती।

अटैचमेंट - ईमेल में हम अटैचमेंट करके कोई भी डॉक्यूमेंट भेज सकते हैं या फिर कोई सॉफ्टवेयर, वीडियो, ऑडियो भी यह हो सकता है। पर दोस्तों इसके अंदर अटैचमेंट की सीमा होती है- केवल 25 एमबी  में अटैचमेंट करके भेज सकते हैं अगर आप इससे ज्यादा बड़ी फाइल को शेयर करना चाहते हैं तो आप गूगल ड्राइव का उपयोग कर सकते हैं वहां पर बहुत ही आसानी से हम डॉक्यूमेंट या फिर 25mb से बड़ी फाइल को शेयर कर सकते हैं।

➧ उपयोगी वेबसाइट (राजस्थान में) : राजस्थान सरकार के द्वारा बहुत सारी गवर्नमेंट वेबसाइट हमें प्रदान की गई है जहां से हम बहुत ही अच्छी अच्छी जानकारी ले सकते हैं।

राज्य पोर्टल, राजस्थान सरकार -
यह राज्य सरकार की प्रमुख वेबसाइट है। इस वेबसाइट के द्वारा हम बहुत सारी और भी गवर्नमेंट वेबसाइट पर जा सकते हैं। मुख्य वेबसाइट होने के कारण बाकी गवर्नमेंट की वेबसाइट इस वेबसाइट से लिंक है।
website URL- https://rajasthan.gov.in 

आवेदन भरने के लिए आर.पी.एस.सी. वेबसाइट -
यह राजस्थान लोक सेवा आयोग की वेबसाइट है। और सभी नागरिक सेवाओं हेतु रिक्त पदों पर ऑनलाइन आवेदन भरने के लिए, आवेदन की स्थिति ट्रैक करने के लिए, और समय पर परिणाम प्राप्त करने जैसे सभी कार्य इस वेबसाइट द्वारा किए जाते हैं।
इस वेबसाइट पर जाने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं -
Website URL- https://rpsc.rajasthan.gov.in

राजस्थान आर.टी.ई. पोर्टल - 
राजस्थान आर.टी.ई. पोर्टल राजस्थान राइट टू एजुकेशन (Right to education) ऑनलाइन पोर्टल वेबसाइट निजी स्कूलों में वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की प्रवेश प्रक्रिया को स्वचालित और व्यवस्थित करने के लिए एक वेब आधारित आधारित समाधान है। यह पोर्टल आरटीई कानून के तहत 25% खाली सीटों के लिए प्रवेश को ट्रैक करने और निगरानी रखने में मदद करता है यह वेबसाइट राज्य के 35000 से अधिक निजी स्कूलों को कवर करती है इसलिए निजी स्कूलों शिक्षा विभाग और आम आदमी के मध्य सूचना के अंतर पर पुल की भांति कार्य करता है इस ऑनलाइन सिस्टम की मदद से किसी भी स्कूलों में सीटें सीटों की संख्या प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क की प्राप्ति पूर्ति फॉर्म वितरण और जानकारी अन्य विभिन्न विवरणों के साथ स्कूल में भर्ती छात्रों के विवरण मिल सकते हैं।
Website URL- https://rte.raj.nic.in


हमने आपके लिए अध्याय 4 के सभी नोटस की वीडियो बनाई है आप चाहे तो इन वीडियो को भी देख सकते हैं।
Part-1

Part- 2


आपको ये - RSCIT Book Lesson- 4. (Introduction of Internet "इंटरनेट का परिचय") Notes In Hindi 2019. कैसा लगा। अगर आप RSCIT Book के Other Lessons के Notes पढ़ना चाहते हैं तो, हम RSCIT Book के सभी Lessons के नोट्स आपको प्रदान करेंगे। हम आशा करते हैं की आप इस नोट्स को अपने RSCIT Friends के साथ जरूर शेयर करेंगे।

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Thank u So Much, Have a Nice Day.

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